
भाई अब हम क्या बताये इस ब्लॉग को पड़ने के बाद शायद आपको हमारे जीवन का सारांश पता चल जाए
यही है कहानी अभिमन्यु की ......................
कुछ अब कवितायें तो नही कहूँगा तुकबंदी या आप पंक्तियाँ कह सकते है.............
ये हमने तब लिखी जब जीवन में हम बहुत अकेले हो गए थे कोई भी नही था जिससे हम अपनी मनः स्तिथि को व्यक्त कर पाते... .............
यही है कहानी अभिमन्यु की ......................
कुछ अब कवितायें तो नही कहूँगा तुकबंदी या आप पंक्तियाँ कह सकते है.............
ये हमने तब लिखी जब जीवन में हम बहुत अकेले हो गए थे कोई भी नही था जिससे हम अपनी मनः स्तिथि को व्यक्त कर पाते... .............
जब हम हस्ते हस्ते सारा गम छिपा गए
सबसे छुपा के दर्द को
हम मुस्कुरा दिए,
अपनी हसी ने आज हमको
फ़िर रुला दिया ।
दिल से उठ रही थी
हर एक दर्द की दास्ताँ,
चेहरा बता रहा था
की सब कुछ गवाँ ।
आवाज़ में ठहराव था
आँखों में थी नमी,
और कह रहे थे हमने
सब कुछ भुला दिया ।
जाने हमे हुई थी कितनी
लोगो से शिकायतें,
तनहईयों के देश में
ख़ुद को बसा लिया ।
ख़ुद भी हम से बिचाद कर
अधूरा सा हो गया,
उनको भी इतनी भीड़ में
तनहा बना दिया । ।
